Independence Day

  आन देश की  शान देश की
                      देश की हम संतान हैं।
               रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी ये पहचान है।।

१५ अगस्त सन १९४७ का वह ऐतिहासिक दिन जब हज़ारों स्वतंत्रता सेनानियों की कुबार्नियों को मंज़िल मिली और शासनाधीन भारत आज़ाद हुआ। इस दिन को भारत का हर नागरिक बड़े उत्साह एवं स्वदेशानुराग से मनाता है। यह दिन हमने अपने विद्यालय परिसर में उन नौजवानों को याद करते हुए मनाया जो इतिहास के पन्नों में गुमनाम हैं। उन सभी वीरों को शत-शत नमन !

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमने आज़ादी की ७३वीं वर्ष गाँठ को बड़े जोश से मनाया। छात्रों में काफ़ी उत्साह था। समारोह ठीक सुबह ७:३० बजे शुरु हुआ। विद्यालय का संपूर्ण वातावरण देश भक्ति से ओत-प्रोत था। विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्रीमान अहमद आज़ादजी ने राष्ट्रीय ध्वज को फहराया। सभी छात्रों और शिक्षकों ने झंडे को सलामी दी और राष्ट्रीय गान से पूरा वातावरण गुंजायमान हो गया।

प्रधानाध्यापक जी ने वहाँ मौज़ूद छात्रों को भारत की अक्षुण्ण अखंडता को बनाए रखने के लिए शपथ दिलवाई। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हांने एक प्रभावशाली भाषण दिया । सभी वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देते और नमन करते हुए उन्होंने कहा  कि यह आजादी हमें रातों-रात नहीं मिली अपितु  कई वीरों के प्राणों की आहुतियों का परिणाम है कि हम आज इस स्वतंत्र भारत में खुलकर साँस ले रहे हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरंभ , सुरेषपाल वर्मा ‘जसाला’ की कलम से निकली देशभक्ति से सराबोर कविता ‘वीर जवानों की गाथाएँ ’, के साथ किया गया। साहस और स्फूर्ति का संचार करने वाला एक सुंदर देशभक्ति गीत  विद्यालय के गायन समूह ने प्रस्तुत किया। इस गीत के बाद कक्षा दसवीं की छात्रा ध्रिति शाह ने एक ज़ोरदार भाषण दिया । छात्रों ने एक लघुनाटिका ’’ शहादत के गुमनाम वीर ’’ प्रस्तुत की जिसमे ऐसे तीन वीरों के बारे में उल्लेख किया गया जो इतिहास के पन्नों से गुमनाम हैं। विद्यालय के सहायक कर्मचारीगण और अध्यापकगण द्वारा समूह गान पेश किया गया। इस यादगार कार्यक्रम के अंत में एक रोचक नृत्य का प्रदर्षन हुआ जिसका सभी को बेसबरी से इंतज़ार था।

इस अविस्मरणीय उत्सव ने हमारे दिलों में  देशभक्ति और उत्साह का एक नया संचार किया। इन कार्यक्रमों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही समारोह का समापन हो गया। वहाँ उपस्थित जन समूह, अपने दिल में देशभक्ति का जज़्बा व जुबान पर जूस की मिठास लिए घर की ओर प्रस्थान कर गए।

विद्यालय के कुछ छात्र और अध्यापक ‘सेवालयम’ नामक वृद्धाश्रम गए जहाँ छात्रों ने संगीत, नृत्य तथा नाटक द्वारा वहाँ के वरिष्ठजनों एवं छोटे बच्चों में नव चेतना जगाई और सबको भाव-विभोर कर दिया। गत सप्ताह ’स्वतंत्रता दिवस’ समारोह के अंतर्गत विद्यालय में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। ’अनोखी हाट’ के जरिए यहाँ छात्रों द्वारा बनाए गए हस्तकला एवं कागज़ शिल्प के नमूनों को प्रदर्षित किया गया था।
अग्नि रहित खाना - छात्रों ने स्वादिष्ट भोजन बनाया जहाँ अग्नि का नहीं बल्कि उनके कोमल मनोभावों का प्रयोग हुआ था।

वतनबाज़ - पुस्तकालय के एक कोने में कुछ आकर्षक चित्रों का संकलन किया गया जहाँ बच्चों द्वारा रचित कलाकृतियों का प्रदर्षन हुआ। देशभक्ति से संबंधित कुछ किताबें रखी गई और उन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी किया गया।

नज़ारे नज़र से ये कहने लगे, नयन से बड़ी कोई चीज़ नहीं।
तभी मेरे दिल ने ये आवाज़ दी, वतन से बड़ी कोई चीज़ नहीं।।

Added on: 15 Aug 2019

Published by: School Admin